Panthera tigris tigris
विंध्य की परंपरा और संस्कारों का संवर्धन

स्नेही स्वजन,
इस वैज्ञानिक युग में परिस्थियाँ बहुत तेजी के साथ बदल रही हैं। जो तकनीक आज नई है कल पुरानी हो जाती है। तकनीक की तरह जीवन भी सदैव गतिमान है, पर जीवन में तकनीक की तरह शीघ्रता से बदलाव नहीं हो सकता और यह वांछनीय भी नहीं है, क्योंकि जीवन में ऐसा कुछ है जो सदैव सार्वकालिक एवं सार्वदेशिक है और वह है संवेदना, परम्परा और संस्कार। जीवन की आपाधापी में, भौतिक सुखों की स्पर्धा में, सतत् आगे बढ़ते रहने के तनाव में हम इनके लिए अवसर ही नहीं निकाल पाते हैं। आधुनिकीकरण के इस युग में हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं एवं हमारी नई पीढ़ी इनसे दूर होती जा रही है।
परंपराऐ, रीति रिवाज और संस्कृति ही मानव जाति की पहचान है इनके बिना मानव जीवन पशु तुल्य है। इस बदलते परिवेश में आज प्रमुख आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी संस्कृति एवं परम्पराओं को जीवित रखें और संवेदनाओं को कुन्द न होने दें। तभी जीवन की सरसता बनी रह सकेगी एवं जीवन में आनंद के स्त्रोत खोजे जा सकेंगे अन्यथा जीवन अजीविका की मशीन बन जाएगा।
विन्ध्य सांस्कृतिक मंच अपने सीमित साधनों से इस दिशा में प्रयासरत है। हमारी परिकल्पना है – अतीत की विरासत के सम्मान एवं संवर्धन के साथ ऐसा स्थिर आधार तैयार करना जो परम्परा को समृद्ध बना सके एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रख सके। इसके लिए वरिष्ठों, यशस्वी प्रतिभाओं एवं नागरिकों का सम्मान, प्रतिभाओं के सम्मान के प्रोत्साहन के साथ समुदाय को आजीविका के सम्मानपूर्ण अवसरों को उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास के लिए कृत संकल्प है। विन्ध्य की रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने की दृष्टि से मंच द्वारा अपनी एक पत्रिका विन्ध्यिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया था जो अन्तरालों एवं व्यवधानों के उपरांत भी अनियतकालिक अंतराल से ही सही, होता आया। संस्था की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही संस्था का भवन । यह दुष्कर कार्य पत्रिका के लिए प्राप्त विज्ञापनों की बचत राशि एवं सदस्यों व एवं अन्य सुधीजनों के सहयोग से सम्भव हो सका।
पिछले दो दशको से अधिक समय से मंच समय-समय पर विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है, जिसके अंतर्गत भागवत कथा, संत समागम, विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिनिधियों का सम्मान, बघेली एवं बुन्देली लोक गीतो एंव लोक नृत्यों की मंचीय प्रस्तुति, बघेली व हिन्दी कवि सम्मेलन और पत्रिका विन्ध्यिका का प्रकाशन सम्मिलित रहा है।
ग्रेगेरियन/अंग्रेजी नए वर्ष का प्रारंभ हम विनम्रतापूर्वक बड़े आयोजनों से करने का प्रयास कर रहे हैं। 19 जनवरी 2025 को जबलपुर से लगे ग्रामीण अंचल के ग्राम बारहा में विशाल स्वास्थ्य शिविर (मेगा हेल्थ कैम्प) जिसमें हृदय, मस्तिष्क, सामान्य स्वास्थ्य एवं नेत्र चिकित्सा जैसी विधाओं के विशेषज्ञ चिकित्सक बाहर से आकर सेवा देंगे। इसके अतिरिक्त विभिन्न सामाजिक सेवाओं की आयोजना है, जिनमें रक्तदान शिविर एवं रक्त दाताओं का डाटाबेस तैयार करना, आयुष्मान कार्ड निर्माण एवं वितरण, कृषि समस्या, विधिक समस्या, पशु चिकित्सा, बैंकिंग के परामर्श के लिए भी विशेज्ञ उपलब्ध रहेंगे। इसके अतिरिक्त ग्रामीणों से संवाद एवं भोजन का कार्यक्रम है।
इस प्रकार आयोजनों की श्रंखला का प्रारंभ इस विश्वास से आयोजित है कि इस प्रकार के कार्यक्रम आगे आने वाले समय में होते रहेंगे। हमारी आशाएं मंच के युवा सदस्यों पर टिकी हुई हैं। मैं उनका आव्हान करता हूँ कि नए वर्ष का प्रारंभ जिस प्रकार के विशाल कार्यक्रम से प्रारंभ हो रहा है, उन्हें निरंतर रखने को स्वप्रेरणा से आगे बढ़कर उत्तरदायित्व उठाएँ और संस्था को नई ऊचाईयों पर ले जाये। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह ' अपनी बात' उन्हें ऐसा करने की प्रेरणा दे। मुझे विश्वास है हम सब मिलकर हमारी संस्था को नई ऊचाईयों तक ले जाने में सफल होंगे।